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मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले Top 20 Shayari Of Jaun Eliya

ये वार कर गया है पहलू से कौन मुझ पर
था मैं ही दाएँ बाएँ और मैं ही दरमियाँ था

उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं

ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या



मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को

मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं

कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे

क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
आख़िरी बार मिल रही हो क्या

कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया

कौन इस घर की देख-भाल करे
रोज़ इक चीज़ टूट जाती है

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने

जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है

हर शख़्स से बे-नियाज़ हो जा
फिर सब से ये कह कि मैं ख़ुदा हूँ

बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या

अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो
वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी

आज बहुत दिन ब'अद मैं अपने कमरे तक आ निकला था
जूँ ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है

अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर
कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते

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