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अपने ही आप तक गए होंगे Apne Hi Aap Tak Gye Honge

घर से हम घर तलक गए होंगे 
अपने ही आप तक गए होंगे 

हम जो अब आदमी हैं पहले कभी 
जाम होंगे छलक गए होंगे 

वो भी अब हम से थक गया होगा 
हम भी अब उस से थक गए होंगे 

शब जो हम से हुआ मुआ'फ़ करो 
नहीं पी थी बहक गए होंगे 

कितने ही लोग हिर्स-ए-शोहरत में 
दार पर ख़ुद लटक गए होंगे 



शुक्र है इस निगाह-ए-कम का मियाँ 
पहले ही हम खटक गए होंगे 

हम तो अपनी तलाश में अक्सर 
अज़ समा-ता-समक गए होंगे 

उस का लश्कर जहाँ-तहाँ या'नी 
हम भी बस बे-कुमक गए होंगे 

'जौन' अल्लाह और ये आलम 
बीच में हम अटक गए होंगे 

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